क्या आप पैरों की जलन, झनझनाहट, माइग्रेन, सर्वाइकल या बीपी से परेशान हैं?
क्या बार-बार होने वाली ये समस्याएं आपकी दिनचर्या और जीवनशैली को प्रभावित कर रही हैं?
आयुर्वेद के अनुसार, इन सभी समस्याओं का एक सामान्य कारण हो सकता है – शरीर में “आम रस” का निर्माण। नाड़ी वैद्य सत्यप्रकाश आर्य जी, जिनके पास 39 वर्षों से अधिक का अनुभव है, बताते हैं कि शरीर के भीतर की समस्याएं हमारे पाचन तंत्र, रस धातु, वायु और आम रस के असंतुलन से जुड़ी होती हैं।
आम रस क्या है और यह कैसे बीमारियों का कारण बनता है?
आयुर्वेद कहता है कि जो भोजन हम खाते हैं वह सबसे पहले रस धातु में परिवर्तित होता है। यह रस धातु फिर रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र धातुओं का निर्माण करती है। लेकिन जब पाचन कमजोर हो जाता है या भोजन ठीक से नहीं पचता, तो शुद्ध रस की बजाय शरीर में “आम रस” बनने लगता है।
आम रस यानी ऐसा अपक्व रस जो शुद्ध नहीं होता, जो शरीर में रुकावटें पैदा करता है, रक्त वाहिनियों में जाम बनाता है और वायु की गति को रोकता है। यही अवरोध आगे चलकर बनाता है:
- पैरों में जलन या सुनपना
- माइग्रेन या सिरदर्द
- सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
- हाई ब्लड प्रेशर (BP)
- नसों की सूजन या नस फटना
- ब्रेन हैमरेज या पैरालिसिस जैसी गंभीर स्थिति
जब आम रस हृदय या मस्तिष्क तक पहुंचता है और वायु की गति को बाधित करता है, तो रक्त संचार रुक जाता है। इससे बीपी बढ़ता है, नसों में तनाव आता है और शरीर में नीले धब्बे तक दिखने लगते हैं।
समाधान क्या है? पेट साफ करना और अनुलोमक औषधि का सेवन
सत्यप्रकाश जी बताते हैं कि इन समस्याओं की जड़ है – पाचन तंत्र की खराबी और मल का साफ न होना।
आयुर्वेद दो प्रकार की औषधियों का उल्लेख करता है:
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रेचक औषधि – जो पेट को पूरी तरह साफ कर देती है, लेकिन यह शरीर को कुछ क्षीण कर सकती है।
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अनुलोमक औषधि – जो शरीर की पाचन शक्ति को सुधारती है, मल को पकाकर बाहर निकालती है और शरीर को ताकत देती है।
अनुलोमक औषधि का सही प्रयोग शरीर को रोगमुक्त करता है और बार-बार दवा लेने की आवश्यकता नहीं होती।
सरल उपाय जो आप रोज़ कर सकते हैं
1. भोजन से पहले थोड़ा मीठा खाएं
यह पाचन अग्नि को सही करता है और रस धातु का निर्माण सहजता से करता है।
2. भोजन के बाद तक्र (छाछ/लस्सी) का सेवन करें
यह आम रस बनने से रोकता है और पाचन को सुदृढ़ करता है।
3. भोजन के बीच नींबू पानी का सेवन करें
नींबू वाला पानी छोटे-छोटे घूंट में पीते हुए जीभ और मुख को धोता रहे – यह मुरमुंद प्रक्षालन कहलाता है और रस वाहिनियों को स्वच्छ रखता है।
4. रात को सोते समय नाक में गाय का घी डालें
यह मानसिक तनाव और माइग्रेन जैसी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है। यह मस्तिष्क में वायु के संतुलन को बनाए रखता है।
नाड़ी परिक्षण द्वारा निदान और उपचार
नाड़ी वैद्य सत्यप्रकाश आर्य जी नाड़ी परिक्षण द्वारा यह समझते हैं कि शरीर में कौन-सी धातु असंतुलित है, कौन-सी वात, पित्त या कफ में गड़बड़ी है और कौन-सी औषधि आवश्यक है। उनके द्वारा सुझाई गई अनुलोमक औषधि व्यक्ति को स्थायी रूप से राहत देती है।
संपर्क करें – स्वस्थ जीवन की ओर पहला कदम
अगर आप भी पैरों की जलन, झनझनाहट, माइग्रेन, बीपी या अन्य उपर्युक्त समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो नाड़ी वैद्य से परामर्श अवश्य लें। अपने शरीर को समझिए, कारण को पहचानिए और आयुर्वेद से स्थायी समाधान पाइए।
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